करीर या करील या कैर के फायदे | Kair ya kareer ya kareel ke fayde |

3:20 pm / staff / 0 comments
Category:
LIVER DISEASES

यहां हम आपकोकरीर या करील या कैर के फायदे” के बारे में जानकारी दे रहे हैं। उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए ज्ञान वर्धक साबित होगा। तो आइए शुरूआत करते हैं

 

करीर या करील या कैर के फायदे (Kair ya kareer ya kareel ke fayde)

करील (करीर ) यह एक प्रसिद्ध काँटेदार झाँड़ी है जिसमें पत्ते नहीं होते यह कंकरीली भूमि में उगने वाली झाड़ी है। यह उष्ण जलवायु का पादप है। जिस समय करील की झाड़ी में पुष्प और फल लगते हैं उस समय इसकी शोभा निराली होती है। इसे कैर के नाम से भी जाना जाता है।

आयुर्वेदिक मत से करील कसैला, गर्म प्रकृति का, चरपरा, आफरा पैदा करने वाला, रूचि कारक, भेदक, विष नाशक, विरेचक और कृमि नाशक होता है। यह खांसी और श्वास में लाभदायक है। व्रण और बवासीर में इसका उपयोग फायदेमंद है। यह ग्राही, मुख की दुर्गंध दूर करने वाला तथा पित्त और मूत्र संबंधी तकलीफों को नाश करने वाला है।

इसके फूल कफ और वात को नष्ट करने वाले हल्के और रुचिकारक होते हैं। इसके कच्चे फल कफ को नष्ट करने वाले, सूजन में लाभदायक तथा पके फल कफ और पित्त नाशक है।

इसकी जड़ तीसरे दर्जे में गर्म और खुश्क हैं। फल तीसरे दर्जे में गर्म और दूसरे दर्जे में खुश्क है। किसी किसी-किसी के मत से गर्म और तर है। बीज तीसरे दर्जे में गर्म और खुश्क। पत्ते पहले दर्जे में और फूल दूसरे दर्जे में गर्म और खुश्क है अर्थात यह पूरा वृक्ष गर्म प्रकृति का है।

यह औषधि आमवात, कटिबद्ध, हिचकी, कफ और श्वास में फायदेमंद है। यह कफ के दोष को मिटाती है। फोड़े-फुंसी और बवासीर में लाभदायक है। शरीर के अंगों की सूजन को मिटाती है। इसका फूल कफ और पेट के विकार को दूर करता है। यह फालिज(लकवा) और तिल्ली की बीमारी में लाभदायक है। यह दस्तो को रोकने वाला और कब्जियत पैदा करने वाला है। यह  जोड़ों के दर्द और क्षय की बीमारी में भी लाभदायक है। इसका फल दिल को मजबूती देता है। स्मरण शक्ति और बुद्धि को बढ़ाता है। काम इंद्रिया को बलवान करता है।

करीर या करील या कैर के फायदे | Kair ya kareer ya kareel ke fayde |

विभिन्न बीमारियो में करीर के फायदे निम्नलिखित हैं:

पेट के कीड़ों को मारने में लाभकारी:

इसके पत्तों का रस पेट के कीड़ों को नष्ट करता है।

फफोले, फोड़ा, फुंसियां ठीक करने में सहायक:

इसकी नाजुक शाखाए और पत्ते पीसकर फफोलो पर लगाए जाते हैं। यह फोड़े फुंसी भी ठीक करती है।

जोडों का दर्द दूर करने में फायदेमंद:

इसका चूर्ण जोड़ों के दर्द में भी फायदा पहुंचाता है।

दांतों की पीड़ा दूर करने में फायदेमंद:

दांतों की पीड़ा में भी इसकी मुलायम शाखाओं को चुसना फायदेमंद है। इसकी कोमल कोपल को मुंह में रखकर चबाने से दांत की पीड़ा मिट जाती है

बुखार दूर करने में सहायक :

इसकी कोमल कोपले और कोमल पत्तों को पीसकर टिकिया बनाकर हाथ की कलाई पर बांधने से बुखार सही हो जाता है

तिल्ली मिटाने में फायदेमंद:

इसकी सुखी कोपलो के चूर्ण को 10 ग्राम की मात्रा मे लेकर 3 ग्राम कालीमिर्च के साथ प्रातकाल फंकी लेने से तिल्ली मिट जाती है।

खूनी बवासीर में इससे छुटकारा –

इसकी 10 ग्राम जड़ को 3 किलो पानी में औटाकर जब आधा किलो पानी रह जाए तब उसके दो हिस्से कर के दिन में दो बार सुबह और शाम पिला देना चाहिए। इस प्रकार एक सप्ताह तक प्रयोग करने से खूनी बवासीर में खून आना बंद हो जाता है और बवासीर में बहुत ज्यादा फायदा मिलता है और जल्द ही इससे छुटकारा मिल जाता है।

जोड़ों और कमर दर्द दूर करने में फायदेमंद :

इसकी लकड़ी की राख को घी में मिलाकर चाटने से जोड़ों की पीड़ा मिटती है। कमर का दर्द भी इससे नष्ट होता है।

बाल बढ़ाने में सहायक:

इसकी जड़ को पीसकर बालों की जड़ में मलने से बाल बढ़ते हैं।

तव्चा रोग में फायदेमंद:

इसकी जड़ की छाल को सिरके में पीसकर दाद, झाई और फोड़े फुंसियों पर लगाने से फायदा होता है।

जहरीले जानवरों के जहर दूर करने के लिए विष नाशक :

इसकी जड इसके दूसरे अंगों से ज्यादा प्रभावशाली है। इसमें विष नाशक शक्ति भी रहते हैं। इसलिए जहरीले जानवरों के जहर दूर करने के लिए इसका उपयोग किया जाता है

जलोदर (पेट पानी से फूलना) रोग में फायदेमंद:

जलोदर रोग हो जाने पर तो करील की जड़ को सुखाकर उसका चूर्ण करके 10 ग्राम की मात्रा में प्रतिदिन एक सप्ताह तक सेवन करें और भुनी हुई और चिकनी चीजों से परहेज करें। इससे बहुत लाभ होता है।

 

इसकी मात्रा चूर्ण के रूप में 5 ग्राम, काढे में 10 से 20 मिली. तक और रस के रूप में 15 ग्रा्म है।

Kareera or Karira Extract capsule | Ayurvedic karira capsule | benefits of Karira | Karira for Liver diseases | karira for Fatty Liver | advantage of karira |