कासनी या चिकोरी के फायदे | kaasni ya chikori ke fayde | benefits of kashni |

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LIVER DISEASES

यहां हम आपको “कासनी या चिकोरी के फायदे ”के बारे में जानकारी दे रहे हैं। उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए ज्ञान वर्धक साबित होगा। तो आइए शुरूआत करते हैं-

कासनी या चिकोरी का परिचय:

भारत में कासनी उत्तर-पश्चिम में 6000 फीट की ऊंचाई  पर पंजाब, कश्मीर, उत्तर प्रदेश, उत्तराखण्ड, में पाया जाता है। मुख्य रूप से कासनी की जड़ को औषधि के रूप में उपयोग किया जाता है। कासनी का सेवन पाचन की दिक्कत, भूख की कमी, पेट में परेशानी, लिवर रोग, कब्ज के इलाज के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है। कासनी का इस्तेमाल औषधीय रूप में किया जाता है और कॉफ़ी में इसकी जड़ों को भुनकर मिलाया जाता है जिससे कौफी का स्वाद स्वादिष्ट हो जाता जाता है। इसकी जड़ मूली के जैसी दिखाई देती है। कासनी के पौधे पर नीले रंग के फूल दिखाई देते हैं जिनसे इसका बीज तैयार होता है। इसके बीज भूरे सफेद से दिखाई देते हैं।

कासनी को भारत में ज्यादातर जगहों पर लोग हरे चारे की फसल के रूप में अधिक उगाते हैं. क्योंकि लोगों को इसकी खेती के उपयोग के बारें में अधिक जानकारी नही है। इसकी रबी की फसलों के साथ की जाती है। इसकी खेती के लिए समशीतोष्ण और शीतोष्ण दोनों जलवायु उपयुक्त होती है। इसके पौधों को विकास करने के लिए सामान्य तापमान की जरूरत होती है। इसकी खेती के लिए सर्दी का मौसम सबसे बढ़िया रहता है। आयुर्वेद में कासनी के पञ्चाङ्ग का औषधि के रुप में ज्यादा इस्तेमाल किया जाता है।

कासनी चूर्ण को पानी, दूध या शहद के साथ मिलाकर सेवन कर सकते हैं।

कासनी या चिकोरी के फायदे

कासनी या चिकोरी के फायदे (Benefits of Kaasni)

कासनी के गुणों के आधार पर इसके फायदे के बारे में विस्तार से जानते हैं-

लीवर के लिए फायदेमंद है कासनी (Kasni Beneficial in Liver disease):

कासनी के फूलों का शर्बत बनाकर पीने से लीवर से जुड़े रोगों में लाभ होता है। लीवर को स्वस्थ रखने में भी कासनी मुख्य भूमिका निभाती है। कासनी में हिपेटोप्रोटेक्टीव (Hepatoprotective) गुण पाए जाते हैं, जो लीवर को सुरक्षित रखने का काम करते हैं।

पाचन में कासनी के फायदे (Kashni benefits in Digestion):

पाचन तंत्र संबंधी समस्याओं से राहत दिलाने में कासनी की अहम भूमिका हो सकती है। चिकोरी में इनुलिन (Inulin -डाइटरी फाइबर) की अच्छी मात्रा पाई जाती है, जो एसिड रिफ्लक्स (पाचन संबंधी रोग) के साथ-साथ आंतों और पाचन संबंधी कई समस्याओं से निपटने में मदद कर सकता है। इसके अलावा, यह अपच और हार्टबर्न से भी राहत दिला सकता है।

पीलिया में कासनी के फायदे (Chicory Beneficial in Jaundice):

खान-पान में असंतुलन होने पर पीलिया हो जाता है इसके लिए 5-10 मिली कासनी पत्ते का रस या 15-20 मिली कासनी पत्ते के काढ़े का सेवन करने से पीलिया में लाभ होता है। इस अवधि में रोगी को दूध तथा चावल का सेवन करना चाहिए। घी तथा शक्कर का प्रयोग मना होता है।

सिर दर्द में कासनी है फायदेमंद (Kaasni Benefits for Headache):

अगर सिर में दर्द होता है तो कासनी के बीजों का चूर्ण एक ग्राम या काढ़ा 10 मिली का सेवन करने से सिर दर्द कम होता है। कासनी पत्ते के रस को माथे पर लगाने से भी सिरदर्द कम होता है।

वजन घटाने में मददगार (Kashni benefits in Weight Loss):

कासनी के फायदे शरीर के वजन को कम करने के लिए भी देखे जा सकते हैं। कासनी में फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है। फाइबर शरीर में ऊर्जा को बनाए रखने के साथ-साथ लंबे समय तक भूख को नियंत्रित रखने का काम कर सकता है

उल्टी से दिलाये राहत कासनी (Kashni benefits to get relieve from Vomiting)

अगर खान-पान की गड़बड़ी होने के कारण उल्टी कम होने के नाम नहीं ले रहा तो कासनी का प्रयोग इस तरह से करने पर लाभ मिलता है 10-15 मिली कासनी बीज के काढ़े का सेवन करने से पित्त के कारण होने वाली उल्टी में फायदा मिलता है।

मूत्र संबंधी बीमारी में कासनी के फायदे (Kasni Benefits in Liver disease):

मूत्र करते समय जलन, रुक-रुक कर पेशाब होना, कम पेशाब होना आदि में कासनी के बीजों का काढ़ा बनाकर 15-20 मिली मात्रा में पिलाने से लाभ होता है।

मसूड़ों के दर्द को करे कम कासनी (Benefits of Kasni Plant for Gum Disease):

कासनी के बीजों का काढ़ा बनाकर गरारा करने मसूड़ों का दर्द ठीक हो जाता है।

अनिद्रा में लाभकारी है कासनी (Kasni Plant Benefits in Insomnia)

अलग अलग कारणों की वजह से तनाव और काम के दबाव के कारण अनिद्रा की समस्या से अधिकतर लोग परेशान रहते हैं। कासनी के पत्तों के साथ पित्तपापड़ा, गिलोय व नागरमोथा मिलाकर काढ़ा बनाएं। 15-20 मिली काढ़ा का सेवन करने से निद्रा की समस्या में लाभ होता है। यह काढ़ा अन्य रोगों में भी फायदा पहुंचाता है।

हृदय रोग में कासनी है फायदेमंद (Kasni Leaves Beneficial in Heart Disease)

हृदय को सेहतमंद रखने में कासनी बहुत काम आता है। कासनी के पत्तों को जौ के आटे के साथ पीसकर हृदय के जगह पर लेप करने हृदय संबंधी बीमारियों में लाभ होता है।

माहवारी या मासिक धर्म में कासनी या चिकोरी के फायदे (Kashni Help to Fight Menopause):

कासनी बीज का काढ़ा बनाकर,15-20मिली काढ़े में गुड़ मिलाकर पीने से मासिक धर्म संबंधी समस्याओं से निजात मिलती है। कासनी की जड़ का काढ़ा बनाकर 15-20 मिली मात्रा में पिलाने से भी लाभ होता है।

गठिया या अर्थराइटिस के दर्द को कम करने में कासनी के फायदे (Chicory to Treat Arthritis):

गठिया या अर्थराइटिस की समस्या बढ़ती हुई उम्र में प्रायः देखने को मिलती  हैं। कासनी के पत्तों को पीसकर लेप करने से इसमें लाभ होता है।

आँखों के बीमारी में लाभकारी कासनी (Kashni benefits in Eye disease)

कासनी आँखों के बीमारी के लिए भी बहुत लाभकारी होता है। कासनी के पत्ते को पीसकर आंखों के बाहर चारों तरफ लगाने से आराम मिलता है।

शीतपित्त या स्किन रैशेज में फायदेमंद कासनी (Kasni Beneficial in Urticaria)

आजकल के प्रदूषण भरे वातावरण में स्किन रैशेज से सब परेशान रहते हैं। कासनी के पत्तों को लाल चन्दन, गुलाब के अर्क तथा सिरके के साथ पीसकर लगाने से शीतपित्त में लाभ होता है।

कब्ज से छुटकारा (Kashni benefits in Constipation)

कासनी में इनुलिन नामक तत्व पाया जाता है, जो फाइबर की तरह काम करता है। फाइबर पाचन में सुधार करने के साथ-साथ बाउल सिस्टम को बेहरत करने में मदद कर सकता है, जिससे कब्ज की समस्या से निजात पाया जा सकता है।

कैंसर के लिए फायदेमंद है कासनी (Kashni benefits in Cancer):

कासनी में पाए जाने वाले पॉलीफेनॉल्स और फोटोकैमिकल्स गुण कैंसर को सही करने में सहायक हो सकते हैं। साथ ही इसकी जड़ में भी एंटी-कैंसर गुण पाए जाते हैं अतः इसके चूर्ण या काढ़े से लाभ हो सकता है। 

डायबिटीज में ब्लड सुगर लवेल को कम करने के लिए कासनी का प्रयोग (Kashni benefits in reduce Blood sugar Level):

कासनी को डायबिटीज में ब्लड सुगर लवेल को कम करने के लिए कासनी का प्रयोग किया जाता है।

खून की उल्टी से दिलाये राहत कासनी (Kasani benefits in treating Blood-Vomiting):

खून की उल्टी रोकने या सही करने में कासनी बहुत फायदेमंद है। 1-2 ग्राम वजन में कासनी के पत्तों को पीसकर, ठण्डे पानी के साथ पी लेने से खून की उल्टी से राहत मिलती है।

किडनी के लिए फायदेमंद है कासनी (Kashni benefits in kidney disease)

इसके लिए कासनी की जड़ के अर्क को इस्तेमाल किया जाता है। इससे पेशाब की मात्रा बढ़ सकती है। पेशाब के जरिए किडनी में मौजूद विषाक्त पदार्थ बाहर निकल जाते हैं कासनी का काढ़ा मूत्रल होने से यह पेशाब की मात्रा को बढ़ाता है और किडनी, पेशाब रोगों, शरीर में सूजन आदि में लाभ पहुंचाता है।

 

कासनी का इस्तेमाल कैसे करना चाहिए? (How to Use Kasni in Hindi?)

  • 3-6 ग्राम चूर्ण या
  • 10-20 मिली रस

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