कुटकी के फायदे | kutaki ke fayde | benifits of kutki | अनेक बीमारियों में लाभकारी है कुटकी |

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LIVER DISEASES

यहां हम आपको “कुटकी के फायदे”के संदर्भ में जानकारी दे रहे हैं। उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए ज्ञानवर्धक साबित होगा। तो आइए शुरूआत करते हैं–

कुटकी  कहां पाया या उगाया जाता है (Where is Kutki Found or Grown?)

कुटकी के पौधे (Kutki Plant) हिमालय में जम्मू-कश्मीर से सिक्किम तक 2700-4500 मीटर की ऊँचाई पर प्राप्त होते हैं। कुटकी एक शक्तिशाली आयुर्वेदिक जड़ी बूटी है जो कि मुख्य रूप से बार बार होने वाले लीवर, बुखार, त्वचा विकार और मधुमेह के इलाज में उपयोग होती है। यह हिमालय में 3000-5000 मीटर की ऊँचाई में पाई जाती है। यह आकार में छोटी होती है। इस के फूल ज्यादातर सफेद या नीले रंग में होते हैं।

लीवर के लिए उपयोगी कुटकी का सेवन (Kutki Beneficial for Healthy Liver in Hindi):-
यकृत-विकार या हाथ-पैरों की सूजन में कुटकी का प्रयोग करें।अगर आप किसी लीवर संबंधी समस्या है तो कुटकी का सेवन आपके लिए बहुत फायदेमंद है क्योंकि एक रिसर्च के अनुसार कुटकी में लीवर की कोशिकाओं को स्वस्थ रखने का गुण पाया जाता है।  कुटकी एक ऐसी जड़ी बूटी है जो लिवर की हेल्‍थ को बूस्‍ट कर कई बीमारियों से बचाती है। कटुकी ‘पित्त’ के कारण होने वाले असंतुलन को दूर करने में मदद करता है और पित्त विकारों जैसी समस्याओं को दूर करता है। साथ ही, कटुकी में एक महत्वपूर्ण एंजाइम भी होता है, जिसे ‘कुटकिन’ या ‘पिक्रोलिव’ कहते हैं या लिवर के अच्छे कार्य को सुनिश्चित करता है और टॉक्सिंस को बाहर निकालता है। लिवर की हेल्‍थ को सही रखने के लिए आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी कुटकी बहुत फायदेमंद है।

  • कुटकी के फायदे

kutaki ki fayde

हृदय-रोग में फायदेमंद (Kutki Beneficial in Heart diseases in Hindi):-
दो छोटी चम्मच कुटकी चूर्ण के साथ मुलेठी का चूर्ण 3 छोटी चम्मच मिलाकर मिश्री के शर्बत के साथ देने से हृदय की गति कम होती है, पर शक्ति बढ़ती है। रक्तचाप (ब्लडप्रेशर) बढ़ता है एवं दीपन, पाचन होकर दस्त होते हैं।

मासिक धर्म में कष्ट Menstrual Kutki Beneficial in pain of Menstrual in Hindi):-
दो छोटी चम्मच कुटकी चूर्ण शहद के साथ देने से मासिक धर्म में होने वाला दर्द दूर हो जाता है।

एक्जिमा में फायदेमंद (Kutki Beneficial to Treat Eczema in Hindi):-
कुटकी में त्वचा संबंधी रोग को कम करने का गुण पाया जाता है अर्थात कुटकी त्वचा के रोग के लक्षणों को बढ़ने नहीं देती है। कुटकी और चिरायता को मिलाकर उसका लेप लगाने से एक्जिमा ठीक हो जाता है।

उदर-कृमि (Kutki Beneficial in Tape worms in Hindi):-
उदर-कृमि, पित्त तथा कफ विकारों में कुटकी बहुत लाभ करती है।

जलोदर(Kutki Beneficial in ascites disease in Hindi):-

जलोदर या पेट में पानी भरने के इलाज के लिए इसका उपयोग किया जाता है। 50 ग्राम कुटकी को 200 मिलीलीटर पानी में उबाल लें और सुबह-शाम इसका सेवन करें।

उल्टी आना Kutki Beneficial in vomiting in Hindi):-
कुटकी और शहद को मिलाकर चाटने से उल्टी आना बंद हो जाता है।

पीलिया का इलाज (Kutki Beneficial in joindice disease in Hindi):-

कुटकी सभी आयुर्वेदिक दवाओं में उपयोग की जाने वाली प्रमुख और आवश्यक घटक है जो पीलिया के इलाज के लिए भी उपयोग की जाती है।

आमतौर पर, कुटकी के एक या दो चम्मच पाउडर को पानी के साथ पीलिया के इलाज के लिए उपयोग किया जाता है। साथ ही धनिया पाउडर और गुड़ को मिक्स करके लड्डू बनाएँ और दिन में 2 बार खाएं।

कब्ज में सहायक (Kutki Beneficial to get relief from Constipation in Hindi):-
कुटकी का सेवन कब्ज को दूर करने सहायक होता है, क्योंकि आयुर्वेद के अनुसार कुटकी में भेदन का गुण पाया जाता है जो कि कब्ज को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है यह कब्ज की समस्या का इलाज करने में भी बहुत सहायक है। कब्ज के लिए यह शहद के साथ मिलाकर ली जाती है। इसके अलावा यह अपच के इलाज के लिए कुटकी बहुत मददगार होती है। यह गैस्ट्रिक रस का स्राव बढ़ाती है। यह भूख में सुधार करती है। यह पेट को मजबूत करके अपच के विभिन्न कार्यों को बढ़ावा देने में मदद करती है।

बुखार के लिए (Kutki Benefits in Fighting with Fever in Hindi):-

जब किसी व्‍यक्ति को बुखार आता है और शरीर का तापमान अचानक से बढ़ने लगता है तो मरीज सबसे पहले बुखार की दवा लेता है। लेकिन क्‍या आपको पता है कि कुटकी खाने से शरीर का तापमान गिरकर आपका बुखार कम हो सकता है। दरअसल, कुटकी में मौजूद एंटीपयरेटिक प्रॉपर्टीज अचानक ठंड लगने और शरीर का तापमान बढ़ाने के लिए जिम्‍मेदार इन्‍फ्लमेशन को कम करती है। कुटकी को आप गर्म पानी या घी के साथ खा सकते हैं। इसके अलावा आप कुटकी को अपने भोजन में डालकर भी सेवन कर सकते हैं।

कुटकी चूर्ण है गठिया में सहायक (Benefit of Kutki to Get Relief from Arthritis in Hindi):-
गठिया के रोग में कुटकी बहुत ही अधिक लाभकारी होती है। कुटकी के साथ 480 से 960 मिलीग्राम शहद सुबह-शाम लेने से गठिया रोग ठीक हो जाता है। इससे रोगी का बुखार भी खत्म हो जाता है।

कुटकी जड़ी बूटी दिलाए रक्त विकार से मुक्ति (Benefit of Kutki to Get Relief from blood disorder in Hindi):-
मुलैठी के साथ इसका प्रयोग करने से यह एंटी-बैक्टीरियल और एंटी-इन्फ्लॉमरेटरी गुण देती है जिससे रक्त विकार, बुखार और हृदय रोग से मुक्ति मिलती है। 10 ग्राम मुलैठी पाउडर और 10 ग्राम कुटकी पाउडर को मिक्स करें। अब इस मिश्रण को 500 मिलीग्राम या 1 ग्राम गुनगुने पानी के साथ मिलाकर दिन में एक या दो बार लें। इसके अलावा 500 मिलीग्राम से 1 ग्राम कुटकी पाउडर को शहद के साथ सुबह-शाम खाने से हृदय की दुर्बलता दूर हो जाती है।

हिचकी और उल्टी का इलाज (Benefit of Kutki in Hiccup and vomiting in Hindi):-
अनुसंधान के अनुसार यह जड़ी बूटी सभी लिवर संबंधी समस्याओं के लिए बहुत उपयोगी है। इसलिए यह पीलिया के कारण हिचकी और उल्टी का इलाज करने में सहायक होती है।
एक चम्मच शहद में 1 ग्राम कुटकी को मिलाएं। और दिन में 2 बार इसका सेवन करें।

कुटकी मधुमेह में मदद (Benefit of Kutki to control Diabetes in Hindi):-
कुटकी रक्त में शर्करा की मात्रा को नियंत्रित करने में मदद करती है। आयुर्वेद के अनुसार भी कुटकी में तिक्त रस होता है जो कि शर्करा को नियंत्रित करने में मदद करती है। इसके मुख्य गुणधर्म पाचन स्राव को उत्तेजित करते हैं जो बदले में अग्नाशयी इंसुलिन स्राव को उत्तेजित करते हैं। यह ग्लाइकोजन के रूप में रक्त शर्करा के संचय में लीवर की सहायता करती है, जो मधुमेह प्रबंधन में आवश्यक है।

कुटकी पाउडर है वजन कम करने में उपयोगी (Kutki Beneficial in Weight Loss in Hindi):-

कुटकी शरीर के अंदर उपस्थित अपशिष्ट पदार्थो को बाहर निकाल कर वजन को कम करने में मदद करते है। कुटकी का उपयोग किसी भी वजन कम करने के कार्यक्रम के लिए एक मुख्य हर्बल घटक के रूप में उपयोग किया जा सकता है क्योंकि यह कड़वा एजेंट पाचन अग्नि, स्वस्थ उन्मूलन और चयापचय को बढ़ावा देने के लिए बहुत ही अच्छा है।

कुटकी, चित्रक और त्रिकटु के पाउडर को समान मात्रा में मिलाएं। मिक्स करने के बाद इस मिश्रण को लगभग आधा चम्मच गर्म पानी के साथ लें।

आपको इस मिश्रण को एक बार अपने मुँह में घुमा कर फिर निगलना चाहिए। यदि आप अधिक वजन वाले हैं तो दिन में एक बार और अगर अधिक मोटापे से ग्रस्त हैं तो दिन में दो बार इसका सेवन करें।

कुटकी के अन्य फायदे :-

  • दैनिक रूप से कुटकी के काढ़े से 2-3 बार कान धोने से कान का दर्द दूर हो जाता है।
  • कुटकी, हल्दी, नागरमोथा तथा जौ का काढ़ा बनाकर कुल्ला करने से मुंह के सभी रोग ठीक हो जाते हैं।
  • कुटकी को पीसकर गर्म लेप बनाकर घाव पर लगाने से आराम मिलता है। घाव को कुटकी के काढ़े से धोने से भी लाभ होता है। इससे घाव धोने पर घाव का दर्द दूर हो जाता है।
  • कुटकी वायरल हेपेटाइटिस के इलाज के लिए बहुत मददगार होती है। यह प्रतिरक्षा प्रणाली को बढ़ा देती है।
  • 10 ग्राम कुटकी पाउडर को 250 मिलग्राम शहद में मिलाकर सुबह-शाम बच्चे को सेवन कराने से बच्चों के रोग ठीक हो जाते हैं। कुटकी को पानी में पीसकर बच्चों के शरीर पर लेप लगाने से बच्चों का बुखार समाप्त हो जाता है। इसके अलावा कुटकी पाउडर में मिश्री और शहद मिलाकर चटाने से भी बच्चों का बुखार समाप्त होता है।

कुटकी के नुकसान:-

  • गर्भावस्था के दौरान इसके उपयोग को लेकर पूर्ण जानकारी नहीं है तो आपको इसे गर्भावस्था के दौरान लेने से बचना चाहिए।
  • यह दस्त को बिगाड़ सकती है।
  • इनके अधिक सेवन से कंठशोथ, वमन तथा आक्षेप होने लगते हैं।
  • यह जड़ीबूटी प्रतिरक्षा प्रणाली को सक्रिय बनाती है इसलिए यदि आपको मल्टीपल स्केलेरोसिस या ल्यूपस जैसी समस्याएं हैं तो इसका इस्तेमाल करने से बचने का प्रयास करें।
  • कुटकी आपके रक्त में शर्करा के स्तर को कम करती है इसलिए यदि आप मधुमेह के रोगी हैं, तो इससे बचने का प्रयास करें।
  • यदि आप कोई सर्जिकल ऑपरेशन कराने जा रहे हैं, तो शल्यक्रिया के पूरा होने के दो सप्ताह के बाद ही इसका सेवन करें।
  • अगर कुटकी को उचित देखभाल के साथ नहीं लिया जाता है तो यह उल्टी, मतली और चकत्ते का कारण बन सकती है।

कुटकी  के सेवन की मात्रा (How Much to Consume Kutki)

कुटकी का चूर्ण – 0.5-1 ग्राम (साधारण मात्रा)

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