चाभ या पिप्पली के फायदे | Chabh ya Pippali ke fayde | benefits of Long Pipper or Piper chabha in Hindi |

चाभ या पिप्पली के फायदे– Long Pepper (Pippali) Benefits in Hindi

इस लेख में हम एक खास औषधि के बारे में बता रहे हैं, जिसका नाम है चाभ या पिप्पली(Long pepper)। इसे चव्य नाम से भी पुकारा जाता है। आइए जानते हैं शरीर के लिए पिप्पली के फायदे और इसके उपयोग से जुड़ी जरूरी बातें।

पिप्पली (वानस्पतिक नामPiper longum), (पीपली, पीपरी, एवं अंग्रेज़ी: ‘लॉन्ग पाइपर‘), पाइपरेसी परिवार का पुष्पीय पौधा है। इसकी खेती इसके फल के लिये की जाती है। इस फल को सुखाकर मसाले एवं औदषधीय गुणों में प्रयोग किया जाता है। इसका स्वाद अपने परिवार के ही एक सदस्य काली मिर्च जैसा ही किन्तु उससे अधिक तीखा होता है। इनके लिये अंग्रेज़ी शब्द पैपर इनके संस्कृत एवं तमिल नाम पिप्पली से ही लिया गया है।

विभिन्न भाषाओं में इसके नाम इस प्रकार से हैं:

संस्कृत- पिप्पली

हिन्दी- चाभ, पिप्पली, पीपली, पीपरी, चव्य

मराठी- पिपल

गुजराती- पीपर

बांग्ला- पिपुल

तेलुगू- पिप्पलु

अंग्रेज़ी- लांग पीपर (Long pepper), Pipper chabha

benefits of Long Pipper or Piper chabha in Hindi

चाभ या पिप्पली के फायदे – Benefits of Long Pepper (Pippali) in Hindi

शरीर से जुड़ी समस्याओं पर पिप्पली का उपयोग निम्नलिखित तरीके से सकारात्मक प्रभाव दिखा सकता है:

 

लिवर के लिए चाभ या पिप्पली के फायदे (Long Pepper (Pippali) or Chavya benefits in Liver diseases):

चाभ का उपयोग लिवर को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है। इसमें हेपेटोप्रोटेक्टिव (Hepatoprotective) गुण होते हैं, जो लिवर के स्वस्थ रखने का काम करते हैं। इसी गुण की वजह से पिप्पली का उपयोग लिवर से जुड़े जोखिम से बचने के लिए भी किया जाता है। पिप्पली ग्लूटाथिओन (Glutathione) को बढ़ाने का काम करता है नॉन अल्कोहलिक फैटी लिवर यानी बिना शराब का सेवन किए लिवर में अधिक फैट जमने की समस्या से पीड़ित मरीजों में ग्लूटाथिओन का बढ़ना बहुत फायदा पहुंचाता है।

 

पेट की समस्या से दिलाए राहत (Piper Longum for stomach problem):

पेट की समस्या होने पर चव्य(long pepper) इस समस्या को दूर करने में आपके बेहद काम आ सकता है। ऐसे में आपको चव्य का सेवन सौंठ के साथ करना होगा। साथ में आप इसके ऊपर दूध का सेवन भी कर सकते हैं। ऐसा करने से पेट की कई बीमारियों से लाभ मिल सकता है।

 

अपच के लिए चाभ या पिप्पली के फायदे(Long Pepper (Pippali) or Chabh benefits for indigestion):

अपच से राहत पाने के लिए भी चाभ का इस्तेमाल किया जाता है क्योंकि इसमें डाइजेस्टिव गुण होते हैं और डाइजेस्टिव गुण भोजन को सही से पचाने में सहायता करते हैं, जिससे अपच की समस्या से राहत मिलती हैं।

 

कब्ज के लिए (Long Pepper (Pippali) or Chavya benefits in constipation):

कब्ज की समस्या में भी पिप्पली के बहुत फायदेमंद हैं। यह औषधि डाइजेस्टिव एजेंट की तरह काम करती है, जिससे भोजन को सही से पचाने में मदद मिलती है । इसके लिए चाभ चूर्ण को दूध के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है।

 

मलेरिया में (Long pepper or pippali benefits in Malaria):

मलेरिया में भी पिप्पली बहुत फायदेमंद है क्योंकि पिप्पली में एंटी मलेरिया गुण पाए जाते हैं, जो मलेरिया से बचाव करते हैं।

 

बैक्टीरियल इन्फेक्शन के लिए (Long Pepper Benefits in bacterial infection):

बैक्टीरियल संक्रमण से बचने के लिए भी पिप्पली के फायदे देखे जा सकते हैं। पिप्पली से प्राप्त पेट्रोलियम ईथर और एथिल एसीटेट नामक अर्क कई सूक्ष्म जीवों (Microorganisms) के खिलाफ एंटीमाइक्रोबियल प्रभाव प्रदर्शित कर सकते हैं इसके अलावा, पिप्पली के एंटीमाइक्रोबियल गुण कॉलेरा जैसे बैक्टीरियल संक्रमण से बचाव में फायदा पहुंचाते हैं।

 

खांसी के लिए (Long Pepper (Pippali) or Chabh benefits in cough):

खांसी की समस्या होने पर पिप्पली चूर्ण खांसी के प्रभाव को कम करने में मदद करता है। पिप्पली में टीट्यूसिव गुण पाए जाते हैं, जो खांसी से बचाने और राहत दिलाने का मददगार है।

 

दांत दर्द के लिए ((Long Pepper Benefits to Stop teeth pain):

चव्य में पिपराइन नामक एल्कलॉइड पाया जाता है, जो दांतों के दर्द, बुखार, खांसी, सिर दर्द आदि समस्याओं में हर्बल औषधि की तरह काम करता है।

 

दस्त रोकने में पीपली का उपयोग लाभदायक (Long Pepper Benefits to Stop Diarrhea):

पिप्पली के मुख्य घटक पिपराइन में एंटीडायरियल गुण होता है। एंटीडायरियल गुण दस्त के दौरान मल की तीव्रता को नियंत्रित करने का काम करता है। दस्त हो जाने पर पिप्पली का उपयोग किया जा सकता है इसके लिए पिप्पली को पीस लें। 2 ग्राम चाभ पाउडर में गाय के दूध के साथ सेवन करें। इससे दस्त रुक जाते है।

 

अस्थमा के लिए (benefits of piper chabha or Long Pepper in Ashthma):

ब्रोन्कियल अस्थमा (Bronchial Asthma) के इलाज में भी इसका प्रयोग जा सकता है। ब्रोन्कियल अस्थमा होने पर श्वसन मार्ग में सूजन आ जाती है और श्वसन मार्ग सिकुड़ जाता है और जिससे सांस लेने में तकलीफ होती है क्योंकि पिप्पली में एंटीइंफ्लेमेटरी गुण होते है। यह गुण श्वसन मार्ग की सूजन पर सकारात्मक प्रभाव डालती है, जिससे ब्रोन्कियल अस्थमा के दौरान आराम मिलता है ।

 

कोलेस्ट्राल को कम करने में पिप्पली के फायदे (Benefits of Long Pepper to Treat Bad Cholesterol):

पिप्पली के सेवन से कोलेस्ट्रॉल को कम किया जा सकता हैं। इसके लिए पिप्पली चूर्ण (Pippali churna) में शहद मिलाकर दिन में तीन बार खाने से कोलेस्ट्राल की मात्रा नियमित होती है साथ ही हृदय रोगों में भी लाभ मिलता है।

 

आंत की क्षमता में वृद्धि (increases the capacity of intestine):

क्योंकि पिप्पली में डाइजेस्टिव गुण होता है, जो खाने को पचाने में बहुत फायदेमंद होता है। इस गुण के कारण आंतों की स्थिति में फायदा पहुंचता है, जिससे कि पोषक तत्वों के अवशोषण में वृध्दि होती है ।

 

सांसों के रोग में पिप्पली के फायदे (Long Pepper Benefits Benefits in Respiratory Disease):

एक ग्राम पिप्पली चूर्ण (Pippali churna) में दोगुना शहद मिला लें। इसे चाटने से सांसों के रोग, खांसी, हिचकी, बुखार, गले की खराश आदि में लाभ होता है।

 

नींद ना आने की समस्या में पिप्पली के फायदे (Pipper Chabha benefits in sleeping disorder):

नींद ना आने की परेशानी में पिप्पली (Pipali) की जड़ के महीन चूर्ण को 1-2 ग्राम की मात्रा को मिश्री के साथ सुबह और शाम सेवन करें। इससे पाचन ठीक होता हैं और नींद भी अच्छी आती है।

 

स्तनों में दूध बढ़ाने में पिप्पली के फायदे (Piper Longum Medicinal Uses in Increasing Breast Milk):

महिलाओ के स्तनों में दूध की कमी होने पर वे 2 ग्राम पिप्पली फल के चूर्ण में आधा चम्मच शतावर मिलाकर शहद के साथ सुबह-शाम इस्तेमाल करें तो इससे स्तनों में दूध की वृद्धि होती है।

 

आंखों के रोग में पिप्पली के फायदे (Uses of Long Pepper in Eye Disease Treatment):

आंख की बीमारी में पिप्पली का खूब महीन चूर्ण बना लें। इसे आँखों में काजल की तरह लगाएं। इससे आंखों का धुंधलापन,जलन, जाला आदि समस्या में लाभ मिलता है।

 

बुखार में पिप्पली के फायदे (Piper Longum Medicinal Uses in Fighting with Fever):

बुखार को ठीक करने के लिए आधा चम्मच पिप्पली चूर्ण को शहद के साथ सेवन करें। इससे कफ के कारण होने वाले बुखार में लाभ होता है।

इसी तरह 3 ग्राम पिप्पली जड़ चूर्ण में 2 ग्राम घी और 5 ग्राम शहद मिलाकर दिन में तीन बार चाटें। इसके साथ गाय का गर्म दूध पिएं। इससे खांसी के साथ होने वाली गंभीर बुखार में आराम पड़ता है।