तोरई (बिंदल) के फायदे | नेनुआ या तूरी के फायदे | Torai or Bindal ke fayde | Sponge gourd benefits in Hindi | benefits of Turai or Bindal |

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यहां हम आपको तोरई (बिंदल) के फायदे के बारे में जानकारी दे रहे हैं। उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए ज्ञान वर्धक साबित होगा। तो आइए शुरूआत करते हैं-

विभिन्न भाषाओं में तोरई (बिंदल) के नाम निम्नलिखित हैं:

अंग्रेज़ी में: Sponge gourd, luffa cylindrica ;

संस्कृत में: नेनुआ, धार्मागव, महाजालिनी;

हिन्दी में : नेनुआ, बड़ी तोरई, घिया तोरई, बिंदल;

उर्दू में: तूरी

उत्तराखण्ड में: तरोद

गुजराती में: गुलका, तुरई (Turai);

तोरई (बिंदल) बेलनाकार, जिसे स्पंज लौकी (Sponge gourd) के नाम से भी जाना जाता है, एक रेशेदार पौधा है जिसमें काले बीज वाले फल होते हैं। तोरई (बिंदल)  का पौधा अन्य सदस्यों के साथ एक कर्कश है, जिसमें लौकी, कद्दू और खीरे शामिल हैं। यह फूलों की वार्षिक बेल के रूप में उगता है जिसमें परागित फूल कई अंतःस्थापित सेल्युलोज फाइबर की एक प्रणाली में बीज से भरे बेलनाकार हरे फलों में विकसित होते हैं। फल विशेष रूप से युवा होने पर खाने योग्य होता है और इसमें फेनोलिक्स, लैवोनोइड्स, ओलीनोलिक एसिड, एस्कॉर्बिक एसिड, ए-टोकोफेरोल, कैरोटेनॉयड्स, क्लोरोफिल, ट्राइटरपेनोइड्स और राइबोसोम-निष्क्रिय प्रोटीन जैसे यौगिकों का समूह होता है, जो औषधीय उद्देश्य के लिए उपयोग किए जाने पर इसे अत्यधिक प्रभावी बनाता है। तोरई (बिंदल) बेलनाकार में रासायनिक घटक होते हैं जो अतिसंवेदनशीलता प्रतिक्रियाओं पर प्रभाव डालते हैं, इम्युनोस्टिमुलेंट, एंटीइन्फ्लेमेटरी एजेंट के रूप में काम करते हैं और ग्लाइकोसिडेस गतिविधि में कार्य करते हैं,और गर्भाशय के संकुचन को भी प्रेरित करते हैं। बच्चे के जन्म को तेज करते हैं।

 

तोरई (बिंदल) एक पौधा है। जब परिपक्व फल को सूखने दिया जाता है, तो एक रेशेदार, स्पंज जैसी संरचना बनी रहती है। रेशों को पानी में उबाला जा सकता है, जिसे बाद में औषधि के रूप में प्रयोग किया जाता है।

जुकाम के इलाज और रोकथाम के लिए तोरई (बिंदल) को मुंह से लिया जाता है। इसका उपयोग नाक की सूजन और साइनस की समस्याओं के लिए भी किया जाता है। कुछ लोग इसका इस्तेमाल गठिया दर्द, मांसपेशियों में दर्द और सीने में दर्द के लिए करते हैं।

अनुपस्थित मासिक धर्म को बहाल करने के लिए महिलाएं तोरई (बिंदल) का उपयोग करती हैं। दूध के प्रवाह को बढ़ाने के लिए नर्सिंग माताएं इसका इस्तेमाल करती हैं।

कभी-कभी मृत त्वचा को हटाने और त्वचा को उत्तेजित करने के लिए पूरे तोरई  (बिंदल) को त्वचा से रगड़ा जाता है। तोरई  (बिंदल) चारकोल, जो एक बंद कंटेनर में तोरई  (बिंदल) फाइबर को गर्म करके तैयार किया जाता है, चेहरे और आंखों के क्षेत्र में दाद के लिए सीधे त्वचा पर लगाया जाता है।

खाद्य पदार्थों में,तोरई (बिंदल) के फल सब्जियों के रूप में खाए जाते हैं।

कच्चे फल को सब्जी के रूप में खाया जाता है और आमतौर पर उष्णकटिबंधीय एशिया में इस उद्देश्य के लिए उगाया जाता है। कच्चे युवा फलों के विपरीत, पूरी तरह से पकने वाला फल अत्यधिक रेशेदार और अखाद्य होता है, और इसका उपयोग स्क्रबिंग बाथ स्पॉन्ज बनाने के लिए किया जाता है।

तोरई (बिंदल) के फायदे

तोरई (बिंदल) के फायदे [Torai ya bindal ke aushdhiya fayde]:

लीवर-सबंधी रोगों में तोरई (बिंदल) के फायदे:

तोरई में शरीर से टॉक्सिंस बाहर निकालने की बहुत अच्छी प्रॉपर्टी होती है। यह हमारे लीवर से टॉक्सिन, खतरनाक केमिकल, अल्कोहल के बचे हुए टुकड़े और ना पचे हुए फूड पार्टिकल्स को  बाहर निकाल देता है। यह हमारे लिवर के काम करने के लिए एक बेहद  जरूरी मदद साबित होता है। इसके साथ ही यह लिवर में बनने वाले बाइल जूस के बनने और इसके द्वारा प्रोटीन के पाचन में मददगार होता है। आयुर्वेद में तोरई का इस्तेमाल जॉन्डिस से आराम दिलाने के लिए भी किया जाता रहा है।

 

अभिष्यंद (आँख का आना ) में तोरई (बिंदल) के फायदे

नेनुआ के ताजे पत्तों के रस को नेत्र में 2 बूंद टपकाने से नेत्राभिष्यंद (आँख का आना) में लाभ होता है।

 

सांससबंधी रोगों में तोरई (बिंदल) के फायदे:

तोरई के तने (stem)से प्राप्त 125 मिग्रा शुद्ध सार (अर्क)को शहद के साथ मिलाकर सेवन करने से श्वसनतंत्रगत-विकारों में लाभ होता है।

 

हृदय रोग में तोरई (बिंदल) के फायदे

तोरई के 1-2 ग्राम फल चूर्ण को शहद के साथ सेवन करने से हृद्रोगों में लाभ होता है।

 

ग्रन्थि (बद गांठ) में तोरई (बिंदल) के फायदे

तोरई के फल अथवा पत्तो के रस में गुड़, सिंदूर और थोड़ा चूना मिलाकर लेप तैयार करके लगाने से बद गांठ बैठ जाती है या घिया तोरई के फूलों को पीसकर गांठ में लगाने से लाभ होता है।

 

त्वचाविकार में(skin disorder or skin problem) फायदे

नेनुआ बीज तैल को त्वचा रोग वाले स्थान पर लगाने से त्वचा रोगों में लाभ होता है।

 

शोथ (inflammation) में तोरई (बिंदल) के फायदे

तोरई के पत्तों के रस में गोमूत्र मिलाकर सूजन वाले स्थान पर लगाने से सूजन समाप्त हो जाती है।

 

सिर के रोग में फायदेमंद तोरई का प्रयोग :

कच्ची कड़वी तोरई  को पीसकर कनपटी पर लगाने से भी सिर के दर्द से आराम मिलता है। सिर दर्द में तुरई के फायदे बहुत आराम पहुँचाते हैं।

 

आँखों के रोग में तोरई के इस्तेमाल से फायदा :

कड़वी तोरई के बीजों को मीठे तोरई तेल में घिसकर आंखों में काजल की तरह लगाने से काला मोतियाबिंद जल्दी ही ठीक होता है।  तुरई में बीटा कैरोटीन पाया जाता है जिसके कारण यह आँखों के लिए फायदेमंद होता है।

 

तोरई के सेवन से गंडमाला  का इलाज :

आधा कप तोरई रस में थोड़ा सा पिप्पली का चूर्ण मिला लें अब इसे छानकर 1-2 बूंद नाक में डालने से गले की गाँठों में लाभ होता है।

 

टांसिल के सूजन में तोरई का उपयोग फायदेमंद :

तोरई के फल तथा पत्तों का काढ़ा बना लें। इसे 10-20 मिली मात्रा में पीने से टांसिल की सूजन और खाँसी और सांस फूलना ठीक होता है। इसके 2-3 ग्राम बीजों के चूर्ण में शहद मिलाकर रोजाना सेवन करने से भी खाँसी एवं दम (सांस) फूलने की समस्या ठीक हो जाती है।

 

कब्ज में तोरई का उपयोग लाभदायक :

तोरई के बीजों को पीसकर 1-2 ग्राम तक सेवन करने से कब्ज ठीक होता है।

 

तोरई के इस्तेमाल से बवासीर का इलाज :

तोरई के चूर्ण को बवासीर के मस्सों पर लगाएं या गुड़ के साथ चूर्ण की बत्ती बनाकर गुदा में मस्सों पर रखने से बवासीर समाप्त हो जाता है।

कड़वी तोरई (turai) के रस में हल्दी चूर्ण मिलाकर बवासीर के मस्सों पर लगाने से बवासीर में लाभ होता है।

तोरई के पत्तों को पीसकर बवासीर के मस्सों में लगाने से दर्द समाप्त होता है।

 

तिल्ली बढ़ने पर करें तोरई का सेवन

तोरई के बीजों को पीसकर गर्म करके पेट पर लेप करने से बढ़ी हुई तिल्ली ठीक होती है।

 

मधुमेह (डायबिटीज) में तोरई से फायदा

तोरई की सब्जी अथवा तोरई के ताजे फल के 10-15 मि.ली. रस का सेवन करें। इससे मधुमेह (डायबिटीज) में फायदा मिलता है।

 

पेट के रोग में तोरई से लाभ :

तोरई की जड़ के चूर्ण का 1-2 ग्राम खाने से जलोदर(पेट का पानी से फूलना) रोग ठीक होता है। दूसरे तरीके में तोरई के पत्ते को पीसकर लहसुन के साथ मिलाकर पेट पर लेप करने से जलोदर रोग में लाभ होता है।

 

मासिक धर्म विकार में फायदेमंद तोरई का उपयोग

10-20 मिली तोरई (turai) पत्ते के काढ़ा का सेवन करने से रुके हुए मासिक धर्म की परेशानी ठीक होती है। अगर किसी को पेशाब में खून आता है तो इससे पेशाब में खून का आना भी बंद हो जाता है।

 

कुष्ठ रोग के इलाज में करें तोरई का इस्तेमाल :

तोरई के तेल की मालिश करने से कुष्ठ रोगों में लाभ होता है। तोरई के फल से बीज एवं गूदा निकालकर उसमें जल भरकर रात भर रख दें। सुबह 10-15 मिली की मात्रा में इस जल को पीने से कुष्ठ रोग में लाभ मिलता है।

 

त्वचा रोग में तोरई से लाभ :

तोरई के बीजों को पीसकर लगाने से त्वचा रोगों में लाभ होता है। तोरई पञ्चाङ्ग को पीसकर लेप करने से त्वचा की जलन, खुजली आदि विकार ठीक होते हैं।

 

हृदय को स्वस्थ बनाने में तोरई फायदेमंद

नेनुआ में पाए जाने वाले फ्लेवनॉइड्स और टैनिन हृदय रोगों के लक्षणों को दूर करने में मदद करता है।

 

कैंसर के लक्षणों से लड़ने में फायदेमंद तोरई

नेनुआ में पाए जाने वाले फ्लेवनॉइड्स और टैनिन नामक तत्व कैंसर रोग के लक्षणों को दूर करने में मदद करते है। इसके एंटी कैंसर गुण के कारण यह इस रोग में फायदेमंद होता है।

 

 

कोलेस्ट्रॉल को नियंत्रण करने में लाभकारी तोरई

कोलेस्ट्रॉल जैसी परेशानी पाचन तंत्र के खराब होने के कारण होती है और शरीर में आम एकत्रित होना शुरू हो जाता है। तुरई में पाए जाने वाले दीपन-पाचन गुण इस आम को पचाने में मदद करते है।

 

अस्थमा के इलाज में फायदेमंद तोरई

वात और कफ दोष के असंतुलित होने के कारण श्वसन नली में बलगम के रूप में अवरोध उत्पन्न होता है, जिससे अस्थमा हो जाता है। तुरई के उष्ण गुण के कारण यह इस बलगम बाहर निकल आता है और इस रोग में लाभ पहुंचाता है।

 

हाई ब्लड प्रेशर को नियंत्रित करने में तोरई का प्रयोग

यह उच्च रक्तचाप को भी कम या नियंत्रित करने में मदद करता है।

 

तंदुरुस्ती स्वास्थ्य को उत्तम बनाने में :

तोरई , आँवला तथा वच चूर्ण को बराबर बराबर मात्रा में लेकर मिला लें। तीनों के चूर्ण को एक एक ग्राम की मात्रा में ले, फिर उसमें घी और शहद मिला लें, दिन में दो तीन बार इसे सेवन करने से स्वास्थ्य उत्तम बना रहता है।

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