पित्तपापड़ा के फायदे | Pittpapra ke fayde | Benefits of Pittapapra | pittapapda ya parpati ke fayde |

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LIVER DISEASES

यहां हम आपको पित्तपापड़ा के फायदे के बारे में जानकारी दे रहे हैं। उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए ज्ञान वर्धक साबित होगा। तो आइए शुरूआत करते हैं-

पित्तपापड़ा के फायदे

परिचय: – गेंहूं के खेतों में पाए जाने वाले इस छोटे से पौधे की लम्बाई 10-20 सेमी के बीच होती है. इसकी पत्तियों छोटे आकार की होती हैं और इसके फूलों का रंग लाल व नीला होता है. सर्दियों के मौसम में ये गेंहूं के खेतों में ज्यादा पाए जाते हैं.

पित्तपापड़ा औषधीय गुण: –आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में पित्त या वात के प्रकोप से होने वाले बुखार से राहत दिलाने में इसका उपयोग किया जाता है. पर्पट के संदर्भ में कहा गया है कि – एक पर्पटक श्रेष्ठ पित्त ज्वर विनाशन, अर्थात पर्पट पित्तज्वर की श्रेष्ठ औषधि है। यह संग्राही, रुचिकारक, वर्ण्य, अग्निदीपक तथा तृष्णाशामक होता है। पर्पट रक्तपित्त, तृष्णा, ज्वर, दाह, अरुचि, ग्लानि, मद, हृद्रोग, अतिसार, कुष्ठ तथा कण्डूनाशक होता है। लाल पुष्प वाला पर्पट अतिसार तथा ज्वरशामक होता है।

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पित्तपापड़ा के चमत्कारिक फायदे

  • लीवर के रोगों में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in Liver diseases in Hindi):

2-4 ग्राम पर्पट पञ्चाङ्ग चूर्ण के सेवन करने से लीवर की कार्य क्षमता बढ़ती है. इसके अलावा इस चूर्ण का सेवन करने से खून की कमी भी दूर होती है।

  • पेट के कीड़े (Pittapapada benefits in stomach jerms and worms problem in Hindi):

पेट के कीड़ों में भी यह चमत्कारिक लाभ देता है | अगर पेट में कीड़े पड़ गए हो तो पितपापड़ा के साथ वाय – विडंग को मिलाकर इनका काढ़ा तैयार कर ले | इस काढ़े के सेवन से जल्द ही पेट के कीड़े नष्ट होने लगते है |

  • तृष्णा में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in Excessive thirst or polydipsia disease in Hindi):

बार – बार प्यास लगती अर्थात तृष्णा से पीड़ित हो तो पित्तपापड़ा, रक्त चन्दन, नागरमोथा और खस इन तीनो का चूर्ण बना ले और इसमें मिश्री मिलाकर इसकी चटनी तैयार करले | इसका इस्तेमाल करने से तृष्णा खत्म होती है |

  • गर्भावस्था जन्य विकार में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in pregnancy related diseases in Hindi):

पित्तपापड़ा, अतिस, सुगंधबाला, धनिया, गिलोय, नागरमोथा, खस, जवासा, लज्जालु, रक्तचन्दन और खिरैटी – इन सबका काढ़ा बनाकर पीने से गर्भावस्था जन्य सभी विकार दूर होते है |

  • इन्फेक्शन अर्थात संक्रमण (Pittapapada benefits in infections in Hindi):

पित्तपापड़ा सभी प्रकार के इन्फेक्शन को ठीक करता है | जैसे अगर शरीर के अन्दर कोई इन्फेक्शन है या कोई घाव है तो इसका प्रयोग क्वाथ के रूप में करे | लीवर, किडनी, फेफड़े आदि के संक्रमण एवं आंतरिक घाव को भरने में भी यह चमत्कारिक परिणाम देता है | इन सभी में पित्तपापड़ा के काढ़े का इस्तेमाल करना चाहिए |

  • एसिडिटी में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits Acicidy problem in Hindi):

एसिडिटी जैसी समस्याओं में ताजे धमगजरा को दांतों से कुचल कर खाने से तुरंत आराम मिलता है, साथ ही दांतों एवं मसूड़ों के सुजन में भी आराम मिलता है |

  • जीर्ण त्वचा रोग में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in Skin related diseases in Hindi):

पित्त पापड़ा चूर्ण, हल्दी और मक्खन का लेप चर्मरोग पर लगा सकते है।

  • मूत्र संबंधी रोग में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in urinary related diseases in Hindi):

मूत्र संबंधी विकारों में पित्त पापड़ा का चूर्ण, काढ़ा या स्वरस का इस्तेमाल करना चाहिए।

  • खांसी में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in cough in Hindi):

पित्त पापड़ा का काढ़ा खांसी में भी फायदेमंद है। 50 मिलि. कर करके 4-5 बार बार पियें।

  • बुखार में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in fever in Hindi):

गर्मी के कारण बुखार हो तो पित्तपापड़ा, गिलोय एवं तुलसी को मिलाकर इसका काढा बना ले | गर्मी जन्य बुखार में लाभ मिलेगा | पितज्वर में पापड़ा, आंवला और गिलोय इन तीनो का क्वाथ तैयार कर के इस्तेमा करने से लाभ मिलेगा | अगर बुखार सर्दी के कारण है तो पित्तपापड़ा के साथ कालीमिर्च मिलकर इसका काढ़ा तैयार करे जल्द ही सर्दी के कारण आई बुखार उतर जायेगी |

  • ज़ुकाम में पित्त पापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in cold in Hindi):

इसके लिए 25 ग्राम पित्त पापड़ा, 4ग्राम सोंठ,4 ग्राम काली मिर्च , 15 ग्राम मुनक्का और 1लिटर पानी से काढ़ा तैयार कर लें, और 30-50 मिलि. करके दिन में 3–4 बार इस्तेमाल करें।

  • कब्ज में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in constipation in Hindi):

इसके चूर्ण के सेवन से कब्ज में भी आराम मिलता है।

  • मूत्राधिक्य में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in Frequent urination in Hindi)

बार बार पेशाब लगने की समस्या में भी यह आरामदायक है इसके लिए पित्त पापड़ा के काढ़े या चूर्ण का सेवन किया जा सकता है।

  • अपच में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in indigestion in Hindi):

दूध में इसका चूर्ण मिलाकर पीने से लाभ होता है इसमें मिश्री, चीनी या गुड़ कुछ भी मिलाकर पिआ जा सकता है।

  • गंडमाला रोग में पित्तपापड़ा के फायदे (Pittapapada benefits in Goiter in Hindi)

इस रोग में लसीका ग्रंथियाँ बढ़ जाती हैं। रोगी को ज्वर आने लगता है और स्वास्थ्य शनै: -शनै: गिरता जाता है। इसके लिए पित्त पापड़ा के काढ़े का इस्तेमाल करना चाहिए।

  • पीलिया में (Pittapapada benefits in Liver diseases in Hindi):

पित्त पापड़ा का चूर्ण, काढ़ा या स्वरस का इस्तेमाल करना चाहिए।

  • रक्त शुद्धि में (Pittapapada benefits in blood purification in Hindi):

पित्तपापड़ा रक्तशोधक होता है | यह दूषित रक्त हो शुद्ध करता है एवं शरीर से टोक्सिन को बाहर निकालता है | अंग्रेजी दवाइयों के इस्तेमाल से होने वाले साइड इफेक्ट्स को दूर करने के लिए पापड़ा का प्रयोग करना चाहिए | इसके इस्तेमाल से दवाइयों के गंभीर साइड इफेक्ट्स को भी कम किया जा सकता है |ताजे पित्तपापड़ा को कुचल कर इसका दो चम्मच रस निकाल ले और कुच्छ दिनों तक नियमित सेवन करे , इससे रक्त शुद्ध होता है एवं साथ ही शरीर से टोक्सिन भी बाहर निकलते है | दवाइयों के साइड इफेक्ट्स में भी इसके रस का सेवन करना चाहिए |

  • उल्टी रोकने में मदद करता है पित्तपापड़ा (Pittapapada Helps in Controlling Vomiting in Hindi) 

अगर आपको उल्टी हो रही है और आप घरेलू उपायों से उल्टी रोकना चाहते हैं तो पित्तपापड़ा का उपयोग करें. इसके लिए 10-20 मिली पर्पट या पित्तपापड़ा के काढ़े में शहद मिलाकर सेवन करें. इसके सेवन से उल्टी जल्दी बंद हो जाती है.

  • आंखों के रोगों में फायदेमंद है पित्तपापड़ा (Pittapapada Benefits for Eye Disorders in Hindi)

पित्तपापड़ा के रस को आंखों में काजल की तरह लगाने से आंखों के रोगों में फायदा मिलता है

पित्तपापड़ा का उपयोग कैसे करें (How to Use Pittapapada in Hindi)

सामान्य रूप से पित्तपापड़ा के काढ़े का सेवन 10-30 मिली की मात्रा में और रस या जूस का सेवन 5-10 मिली मात्रा में करना चाहिए. इसके अलावा पित्तपापड़ा के चूर्ण को 1-3 ग्राम और पेस्ट को 2-4 ग्राम की मात्रा में लें.

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