पीलिया के लक्षण, कारण और इलाज |

5:53 pm / staff / 0 comments
Category:
LIVER DISEASES

यहां हम आपकोपीलिया के लक्षण, कारण और इलाज” के बारे में जानकारी दे रहे हैं। उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए ज्ञान वर्धक साबित होगा। तो आइए शुरूआत करते हैं

  1. पीलिया: परिचय
  2. रोग का प्रसार कैसे?
  3. रोग कब फैलता है?
  4. रोग के लक्षण
  5. पीलिया रोग के कारण
  6. रोग किसे हो सकता है?
  7. रोग की जटिलताऍं
  8. उपचार
  9. रोग की रोकथाम एवं बचाव

 

पीलिया (Jaundice)

रक्तरस (blood) में पित्तरंजक (Billrubin) नामक एक रंग होता है, जिसके अधिकता होने पर त्वचा और श्लेष्मिक कला में पीला रंग आ जाता है। इस दशा को पीलिया (Jaundice) कहते हैं। इसका मुख्य कारण लिवर का प्रभावित होना है।

सामान्यत: रक्तरस(blood)  में पित्तरंजक(Billrubin) का स्तर 1% या इससे कम होता है, किंतु जब इसकी मात्रा 2.5 % से ऊपर हो जाती है तब पीलिया (Jaundice) के लक्षण प्रकट होते हैं। पीलिया (Jaundice) स्वयं कोई रोगविशेष नहीं है, बल्कि कई रोगों में पाया जानेवाला एक लक्षण है। यह लक्षण नन्हें-नन्हें बच्चों से लेकर बूढ़ों में उत्पन्न हो सकता है रक्त में लाल कणों का अधिक नष्ट होना तथा उसके परिणामस्वरूप अप्रत्यक्ष पित्तरंजक का अधिक बनना रक्त-कोशिका-नाश तथा अन्य जन्मजात, अथवा अर्जित, रक्त-कोशिका-नाश-जनित रक्ताल्पता इत्यादि रोगों का कारण होता है।

 

  1. रोग का प्रसार कैसे?

यह रोग ज्‍यादातर ऐसे स्‍थानो पर होता है जहॉं के लोग व्‍यक्तिगत व वातावरणीय सफाई पर कम ध्‍यान देते हैं अथवा बिल्‍कुल ध्‍यान नहीं देते। भीड-भाड वाले इलाकों में भी यह ज्‍यादा होता है। वायरल हैपटाइटिस बी किसी भी मौसम में हो सकता है। वायरल हैपटाइटिस ए तथा नान व नान बी एक व्‍यक्ति से दूसरे व्‍यक्ति के नजदीकी सम्‍पर्क से होता है। ये वायरस रोगी के मल में होतें है पीलिया रोग से पीडित व्‍यक्ति के मल से,दूषित जल,  दूध अथवा भोजन द्वारा इसका प्रसार होता है।

ऐसा हो सकता है कि कुछ रोगियों की आंख, नाखून या शरीर आदि पीले नही दिख रहे हों परन्‍तु यदि वे इस रोग से ग्रस्‍त हो  तो अन्‍य रोगियो की तरह ही रोग को फैला सकते हैं।

वायरल हैपटाइटिस बी खून व खून व खून से निर्मित प्रदार्थो के आदान प्रदान एवं यौन क्रिया द्वारा फैलता है। इसमें वह व्‍यक्ति हो देता है उसे भी रोगी बना देता है। यहॉं खून देने वाला रोगी व्‍यक्ति रोग वाहक बन जाता है। बिना उबाली सुई और सिरेंज से इन्‍जेक्‍शन लगाने पर भी यह रोग फैल सकता है।

पीलिया रोग से ग्रस्‍त व्‍यक्ति वायरस, निरोग मनुष्‍य के शरीर में प्रत्‍यक्ष रूप से अंगुलियों से और अप्रत्‍यक्ष रूप से रोगी के मल से या मक्खियों द्वारा पहूंच जाते हैं। इससे स्‍वस्‍थ्‍य मनुष्‍य भी रोग ग्रस्‍त हो जाता है

  1. रोग कब फैलता है?

हालांकि यह रोग वर्ष में कभी भी हो सकता है परन्‍तु अगस्‍त, सितम्‍बर व अक्‍टूबर महिनों में लोग इस रोग के अधिक शिकार होते हैं। सर्दी शुरू होने पर इसके प्रसार में कमी आ जाती है।

 

  1. पीलिया के लक्षण (Symptoms of Jaundice in Hindi)

पीलिया(piliya) होने पर ये लक्षण हो सकते हैं:

  • त्वचा, नाखून और आंख का सफेद हिस्सा तेजी से पीला होना
  • गाढ़ा/पीला पेशाब होना
  • मितली आना, पेट दर्द, भूख ना लगना और खाना ना हजम होना
  • वजन घटना
  • लगातार थकान महसूस करना
  • भूख नहीं लगना
  • पेट में दर्द होना
  • बुखार बना रहना
  • हाथों में खुजली चलना

 

  1. पीलिया होने के कारण (Causes of Jaundic)

 

  • हेपेटाइटिस सड़क के किनारे, कटी, खुतली, दूषित वस्तुएं और गंदा पानी पीने से।
  • कुछ दवाओं के चलते भी यह समस्या हो सकती है
  • पैंक्रियाटिक का कैंसर
  • बाइल डक्ट का बंद होना
  • एल्कोहल से संबधी लिवर की बीमारी

 

  1. रोग किसे हो सकता है?

यह रोग किसी भी अवस्‍था के व्‍यक्ति को हो सकता है। हॉं, रोग की उग्रता रोगी की अवस्‍था पर जरूर निर्भर करती है। गर्भवती महिला पर इस रोग के लक्षण बहुत ही उग्र होते हैं और उन्‍हे यह ज्‍यादा समय तक कष्‍ट देता है। इसी प्रकार नवजात शिशुओं में भी यह बहुत उग्र होता है तथा जानलेवा भी हो सकता है।

बी प्रकार का वायरल हैपेटाइटिस व्‍यावसायिक खून देने वाले व्‍यक्तियों से खून प्राप्‍त करने वाले व्‍यक्तियों को और मादक दवाओं का सेवन करने वाले एवं अनजान व्‍यक्ति से यौन सम्‍बन्‍धों द्वारा लोगों को ज्‍यादा होता है।

 

  1. रोग की जटिलताऍं

ज्‍यादातार लोगों पर इस रोग का आक्रमण साधारण ही होता है। परन्‍तु कभी-कभी रोग की भीषणता के कारण कठिन लीवर (यकृत) दोष उत्‍पन्‍न हो जाता है।

इस प्रकार का पीलिया (वायरल हैपेटाइटिस) ज्‍यादा गम्‍भीर होता है इसमें जटिलताएं अधिक होती है। इसकी मृत्‍यु दर भी अधिक होती है।

 

  1. पीलिया का इलाज (Home Remedies for Jaundice Prevention)
  • गन्ने का रस पीलिया के इलाज (Piliya ka ilaj) में अत्यंत लाभकारी होता हैं। अगर दिन में तीन से चार बार सिर्फ गन्ने का रस पिया जाए तो इससे बहुत ही लाभ होता हैं।
  • नीबू, संतरे तथा अन्‍य फलों का रस भी इस रोग में गुणकारी होता है।
  • वसा युक्‍त गरिष्‍ठ भोजन का सेवन इसमें हानिकारक है।
  • दलिया, खिचडी, थूली, उबले आलू, शकरकंदी, चीनी, ग्‍लूकोज, गुड, चीकू, पपीता, छाछ, मूली आदि कार्बोहाडेट वाले प्रदार्थ का सेवन करना चाहिये।

piliya

9. रोग की रोकथाम एवं बचाव

  • पीलिया रोग के प्रकोप से बचने के लिये कुछ साधारण बातों का ध्‍यान रखना जरूरी हैः-
  • खाना बनाने, परोसने, खाने से पहले व बाद में और शौच जाने के बाद में हाथ साबुन से अच्‍छी तरह धोना चाहिए।
  • भोजन जालीदार अलमारी या ढक्‍कन से ढक कर रखना चाहिये, ताकि मक्खियों व धूल से बचाया जा सकें।
  • ताजा व शुद्व गर्म भोजन करें दूध व पानी उबाल कर काम में लें।
  • पीने के लिये पानी नल, हैण्‍डपम्‍प या आदर्श कुओं को ही काम में लें तथा मल, मूत्र, कूडा करकट सही स्‍थान पर गढ्ढा खोदकर दबाना या जला देना चाहिये।
  • गंदे, सडे, गले व कटे हुये फल नहीं खायें धूल पडी या मक्खियाँ बैठी मिठाईयाँ का सेवन नहीं करें।

यहां आपने पीलिया के लक्षण, कारण और इलाज के बारे में पढ़ा उम्मीद है कि आपको यह लेख अच्छा लगा होगा।

पीलिया रोग के परमानेंट इलाज के लिए नीचे एक बहुत ही असरदार दवा को दर्शाया गया है।

पीलिया का इलाज | पीलिया (jaundice) कैसे होता है | Liver Bestie: पीलिया (Piliya) की दवा | पीलिया (piliya) के लक्षण |