लिवर की चर्बी का इलाज 

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LIVER DISEASES

लिवर की चर्बी का इलाज 

अगर आप लिवर की चर्बी के इलाज के बारे में तलाश कर रहे हैं तो आपकी जहां तलाश पूरी हुई क्योंकि इस लेख में हम आपको लिवर की चर्बी का इलाज कैसे करें और फैटी लिवर रोग की समस्त  जानकारी बताने जा रहे हैं।

आज के समय में व्यस्त दिनचर्या और अनियमित जीवनशैली के चलते शरीर कई तरह की बीमारियों के घेरे में आ रहा है. इन्हीं समस्याओं में से एक समस्या है लिवर में चर्बी का जमा होना. फैटी लिवर की समस्या खासकर उन लोगों को जल्दी घेरती है जो चर्बी युक्त भोजन और शराब का सेवन ज्यादा करते हैं. लिवर की कोशिकाओं में सामान्य से अधिक फैट जमा होने से कई तरह की समस्याएं हो सकती हैं. भविष्य में इससे कई तरह के नुकसान भी हो सकते हैं. ऐसी स्थिति होने पर जरूरी है कि अपने खानपान में सुधार किया जाए और नियमित जीवनशैली अपनाई जाए. हालांकि लिवर में जमा चर्बी को कुछ घरेलू नुस्खों से आसानी से दूर किया जा सकता है.

लिवर की चर्बी या फैटी लिवर रोग (Fatty Liver)

लिवर में जब अधिक चर्बी जमा हो जाती है, तो फैटी लिवर की समस्या शुरू हो जाती है लिवर में अतिरिक्त चिकनाई का बनना फैटी लिवर की बीमारी है। फैटी लिवर की बीमारी शराब के अत्यधिक सेवन से हो सकती है और यदि व्यक्ति शराब पीना जारी रखे तो उससे लिवर को गंभीर क्षति हो सकती है. पिछले वर्षों में, डॉक्टरों को यह अहसास हुआ है कि बड़ी संख्या में ऐसे रोगी हैं जो बहुत कम शराब पीते हैं या शराब नहीं पीते हैं, लेकिन फिर भी उनके लिवर में अतिरिक्त चर्बी है. इस विकार को नॉन-एल्कोहलिक फैटी लिवर disease (NAFLD) के रूप में जाना जाता है। इस प्रकार के फैटी लिवर से लिवर में सूजन (सूजन), लिवर स्कारिंग (सिरोसिस), लिवर कैंसर, लिवर की विफलता और मृत्यु भी हो सकती है।

 

 

 

 

 

लिवर की चर्बी या फैटी लिवर के कारण: (Causes of Fatty Liver)

 

  • शराब का सेवन: शराब का सेवन करने से भी फैटी लीवर रोग होता है। शराब पीने से लीवर ख़राब होने का ख़तरा बढ़ जाता है। शराब में काफ़ी मात्रा में वसा पाई जाती है जिसके कारण लीवर पर वसा के जमाव की संभावना अधिक रहती है।

 

  • एक्स्ट्रा कैलोरी– खाने में एक्स्ट्रा कैलोरी वाले आहार का अधिक सेवन लिवर में वसा का निर्माण कर सकता है। लिवर में वसा की यही अधिकता फैटी लिवर की समस्या को जन्म दे सकती है।

 

  • लिवर की कार्यक्षमता कम होनाफैटी लिवर होने के प्रमुख कारणों में यह वजह काफी अहम है। जब किसी कारण से लिवर की प्रक्रिया प्रभावित हो जाती है, तो वह वसा को तोड़ने की प्रक्रिया को अंजाम नहीं दे पाता। फलस्वरूप लिवर में अतरिक्त वसा का जमाव होने लगता है। इस कारण फैटी लिवर की समस्या पैदा हो सकती है।

 

  • वज़न घटाने के लिए सप्लिमेंट्स :अक्सर देखा गया है कि लोग अपने वज़न को घटाने के लिए नये नये तरीक़े अपनाते हैं। इन्हीं में से एक तरीक़ा है सप्लिमेंट्स खाना। कई लोग अपने वज़न को तेज़ी से घटाने के लिए ऐसे सप्लिमेंट्स या प्रोटीन युक्त पदार्थ खाने लगते हैं जो वसा को तेज़ी से जलाते हैं। ये सप्लिमेंट्स शरीर की कई बीमारियों के लिए ज़िम्मेदार माने जाते हैं। कई बार तो सप्लिमेंट्स लीवर डैमेज का ख़तरा भी बन जाते हैं। जब लोग तेज़ी से वज़न घटाना चाहते हैं तो ऐसे में वे सप्लिमेंट्स खाने के अलावा एक काम और करते हैं और वह होता है कि वे अपना खाना पीना छोड़ देते हैं। खाना छोड़ने से उन्हें शरीर के लिए आवश्यक पोषक तत्वों की मात्रा मिलना बंद हो जाती है। इससे लीवर को कार्य करने के लिए पर्याप्त ऊर्जा नहीं मिलती हैं। ये लीवर की कार्य क्षमता को कम कर देती है जिससे लीवर वसा को ग्लूकोज के रूप में जमा करने और रक्त में ग्लूकोज की मात्रा को प्रवाहित करने में मदद असमर्थ हो जाता है। इसका परिणाम ये होता है कि वसा लीवर पर ही अपना जमाव स्थापित करने लगती है।

 

  • पर्याप्त नींद की कमी: ये बात बिलकुल तय है कि पर्याप्त नींद की कमी से लीवर की कार्य क्षमता प्रभावित होती है। लीवर की कार्य क्षमता प्रभावित होने से वसा का जमाव लीवर पर बढ़ने की संभावना काफ़ी ज़्यादा हो जाती है।

 

 

फैटी लिवर के क्या लक्षण हैं?

लिवर की चर्बी  या फैटी लिवर वाले अधिकांश व्यक्तियों में कोई लक्षण नहीं होते हैं, हालांकि कुछ को लिवर के बढ़ने के कारण पेट के दाहिनी ओर दर्द का अनुभव हो सकता है। अन्य लक्षण सामान्य थकान, मतली और भूख न लगना, पेट में पानी भरना (एडिमा), खून की उल्टी , आँखों का पीलापन (पीलिया) हो सकता है।

फैटी लिवर के प्रकार – Types of Fatty Liver

  • नॉन अल्कोहलिक फैटी लीवर डिज़ीज (Non Alcoholic Fatty Liver disease)-एक ऐसी बीमारी है जो शराब पीने से नहीं होती। यह साधारण तौर पर लोगों में देखने को मिल जाती है। इसका कारण अनियमित खानपान और जीवनशैली का सही ना होना होता है। जब लीवर पर किसी प्रकार की सूजन आ जाती है। इस सूजन का कारण भी लीवर पर वसा का जमाव होता है। यह एक प्रकार का साधारण फैटी लीवर का संकेत हो सकता है। साधारण फैटी लीवर की बीमारी इतनी ख़तरनाक नहीं होती और इसका इलाज भी आसानी से किया जा सकता है लेकिन इस बीमारी में लीवर पर सूजन होने के साथ साथ लीवर की कोशिकाओं को भी नुक़सान हो सकता है।
  • अल्कोहलिक फैटी लीवर (Alcoholic Fatty Liver disease)- हमारा लीवर खाने तथा पीने के पदार्थों से हानिकारक तत्वों को बाहर निकालने का कार्य करता है। ये एक प्रकार का फ़िल्टर होता है। शराब लीवर के लिए किसी ज़हर से कम नहीं है। ऐसे लोग जो शराब का सेवन करते हैं तो वे अल्कोहलिक फैटी लीवर डिजीज (Alcoholic Fatty Liver Diseases)से ग्रस्त हो सकते हैं। शराब का सेवन करने से लीवर को अधिक कार्य करना पड़ता है जिससे लीवर की कार्य क्षमता प्रभावित हो जाती है। वैसे तो लीवर शराब को शरीर से निकाल देती है लेकिन शराब से अलग किए गए हानिकारक तत्व तब भी शरीर में रह कर लीवर की कोशिकाओं को नुक़सान पहुँचाने की क्षमता रखते हैं। इससे न सिर्फ़ सूजन की समस्या बढ़ सकती है बल्कि लीवर पर वसा का जमाव भी होना शुरू हो जाता है।

 

फैटी लिवर रोग के कितने चरण हैं?

फैटी लिवर आमतौर पर निम्नलिखित चरणों के माध्यम से आगे बढ़ता है:

  • साधारण फैटी लिवर
  • सूजन के साथ फैटी लिवर (NASH या नॉन-अल्कोहिलक स्टेटोहेपेटाइटिस के रूप में जाना जाता है)
  • फैटी लिवर जिसमे लिवर की स्कार्रिंग हो या लिवर सख्त हो जाये (जिसे लिवर सिरोसिस भी कहा जाता है)

 

फैटी लिवर रोग का निदान (diagnose) कैसे किया जाता है?

फैटी लिवर आमतौर पर रुटीन चेकअप के दौरान पाया जाता है, जब डॉक्टर को बढ़े हुए लिवर का पता चलता है। अल्ट्रासाउंड स्कैन लिवर में फैट दिखा सकती है, जब लिवर का रक्त परीक्षण सामान्य नहीं हो। कुछ नए परीक्षण “फाइब्रोस्कैन” और “फाइब्रोटेस्ट” के रूप में जाने जाते हैं जो अधिक विश्वसनीय हैं। फैटी लिवर के लिए खतरे के कारकों को पहचानना और अपने चिकित्सक के साथ वार्षिक जांच करना महत्वपूर्ण है ताकि रोग का जल्द पता चल सके

 

फैटी लीवर के घरेलू उपाय – Fatty Liver ke gharelu upay in Hindi

  • आंवला : जिन लोगों का पाचन तंत्र कमजोर होता है उन्हें आंवला खाने की सलाह दी जाती है. आवंला में कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं जिससे लिवर हेल्दी रहता है।

 

  • सेब का सिरका: सेब का सिरका जिगर या लिवरमें उपस्थित चर्बी को कम करने में बहुत उपयोगी है।

 

  • हल्दी: इसमें एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटीऑक्सीडेंट गुण होते हैं. शोध से पता चला है कि हल्दी लीवर की चोटों से बचाने और हमारे शरीर को हानिकारक विषाक्त पदार्थों से बचाने में एक शक्तिशाली घटक है.

 

  • एलोवेरा: यह आपके शरीर को डिटॉक्स करता है और उन सभी विषाक्त पदार्थों को बाहर निकालता है जो आपके लीवर को गंभीर नुकसान पहुंचा सकते हैं.

 

  • त्रिफला: त्रिफला का रस पाचन को नियंत्रित करने में मदद करने के लिए इस्तेमाल होता है क्योंकि यह पाचन को बढ़ावा देकर लीवर पर विषाक्त तनाव को कम करता है त्रिफला का सेवन लीवर के लिए काफी फायदेमंद माना जाता है।

 

  • सूखे मेवा या नट्स: सूखे मेवा या नट्स एक हेल्दी डाइट नट्स शामिल होते हैं. नट्स आंत के लिए अच्छे होते हैं. कुछ अध्ययनों से पता चला है कि नियमित रूप से नट्स का सेवन लीवर एंजाइम के स्तर को बेहतर बनाने में मदद करता है. उदाहरण के लिए, अखरोट अमीनो एसिड, ग्लूटाथियोन और ओमेगा 3 फैटी एसिड से भरपूर होते हैं. वे विषाक्त पदार्थों के शरीर को साफ करने में मदद करते हैं.

लिवर की चर्बी

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