सरफोंका या शरपुंखा के फायदे | sarphonkha ya sharphunkha ke fayde | सरफोंका (शरपुंखा) का परिचय और उपयोग | benefits and uses of sharphunkha |

यहां हम आपको सरफोंका या शरपुंखा के फायदे के बारे में जानकारी दे रहे हैं। उम्मीद है कि यह लेख आपके लिए ज्ञान वर्धक साबित होगा। तो आइए शुरूआत करते हैं- 

सरफोंका या शरपुंखा के फायदे:

सरफोंका (शरपुंखा) का परिचय:

सरफोंका एक पौधा है ज‍िसका इस्‍तेमाल आयुर्वेद में बीमार‍ियों को दूर करने के ल‍िए क‍िया जाता है। इस पौधे की जड़, छाल, पत्‍त‍ियां, तना, फूल सभी का इस्‍तेमाल स्‍वास्‍थ्‍य के ल‍िए क‍िसी न क‍िसी तरीके से लाभदायक बताया गया है।

इसे शरपुंखा (संस्कृत), सरफोंका (हिन्दी), शरपंखी (गुजराती) कहते हैं।

सरफोंका का पौधा 2-3 फुट ऊँचा होता है। यह झाड़ीनुमा हर वर्ष उत्पन्न होता है। सरफोंका के पत्ते 3-6 इंच लम्बे होते हैं, जिसमें कई छोटे पत्रक रहते हैं। इसमें फूल लाल रंग के 2-6 इंच लम्बे डंठल पर लगते हैं। इसमें फली 1-2 इंच लम्बी तथा 5-10 बीजों से युक्त होती है।

लाल तथा सफेद रंग के फूलों के भेद से इसकी दो जातियाँ होती हैं। यह समस्त भारत में, अधिकतर पथरीली भूमि में उत्पन्न होता है। सफेद पौंधा कम प्राप्त होता है।

इसमें क्लोरोफिल, राल, मोम, गोंद, कुछ एल्ब्यूमिन, रंजक-द्रव्य, भस्म होते हैं।

यह स्वाद में कड़वा, कसैला, पचने पर कटु तथा हल्का, रूखा, तीक्ष्ण और गर्म होता है। इसका मुख्य प्रभाव पाचन-संस्थान पर पड़ता है।

sharpunkha ke fayde

सरफोंका के उपयोग:

सरफोंका एक पौधा है ज‍िसमें औषध‍िय गुण हैं, इससे कई बीमार‍ियों को दूर क‍िया जाता है। चल‍िए जानते हैं इसके फायदे –

लिवर के लिए फायदेमंद है सरफोंका:

इसका काढ़ा या पाउडर के नियमित सेवन से लिवर की समस्याओं से छुटकारा मिलता है। यह लिवर सिरोसिस जैसी खतरनाक बीमारी तक में फायदेमंद है।

दन्तरोग में शरपुंखा के फायदे:

इसकी जड़ से दातुन करना दाँतों के लिए बहुत फायदेमंद है नियमित प्रयोग करने से दांतों का कोई रोग नहीं होता। दांत के दर्द को दूर करने के लिए सरफोंका के फूल का रस पकाते हैं और उसे ठंडा करने के बाद दांत पर कॉटन की मदद से लगाने से दांत का दर्द सही हो जाएगा इसके अलावा सरफोंका के फूल को कूटकर दांत के नीचे दबाएं तो इससे भीे दांत का दर्द दूर हो जाता है। सरफोंका के रस से नियमित कुल्ला करने से दांतों के कीड़े मर जाते हैं और दर्द भी चला जाता है।

कटने का घाव जल्दी ठीक करने में शरपुंखा के फायदे:

चाकू या अन्य से कट जाने पर शरपुंखा के मूल को दाँतों से चबाकर बाँध देने से घाव से निकल रहा खून बन्द हो जाता है और कुछ दिनों में वह सही भी हो जाता है।

विष नाशक में शरपुंखा के फायदे:

किसी कीड़े या चूहे, गिलहरी आदि के काटने पर शरपुंखा के बीजों को मट्ठे में पीसकर सेवन करने से उसके विष का असर खत्म हो जाता है।

चेहरे के दाग में शरपुंखा के फायदे:

सरफोंका के बीजों का लेप चेहरे के दाग पर लगाने से दाग कुछ दिनों में ही सही हो जाते हैं।

 त्वचा रोगों में शरपुंखा के फायदे:

सरफोंका की पत्तियों के रस के पीसकर दूध या पानी से सेवन करने से खून साफ़ हो जाता है और सभी प्रकार की त्वचा संबंधी समस्याएं दूर हो जाती हैं। त्वचा पर फुंसी हो जाने पर आप सरफोंका का इस्‍तेमाल कर सकते हैं। सरफोंका के इस्‍तेमाल से फुंसी में जमा मवाद खत्म हो जाता है और फुंसी की समस्या दूर होती है, इस औषध‍ि में मौजूद बैक्‍टीर‍ियल गुण के कारण फुंसी या फोड़े में इंफेक्‍शन भी नहीं होता।

 स्तनों की गांठ में शरपुंखा के फायदे:

सरफोंका के जड़ को पानी के साथ पीसकर उसका लेप बनाकर स्तन पर लगाने से स्तन की गांठ ठीक हो जाती है।

खांसी में फायदा पहुंचाता है शरपुंखा:

सरफोंका के धुएँ को सूंघने से सुखी और बलगम दोनों तरह की खांसी ठीक हो जाती है।

अपची में लाभ –

शरपुंखा चूर्ण को खाने के आधा घंटा बाद इस्तेमाल करने से अपची की समस्या ठीक होती है तथा पेट के लिए फायदेमंद होता है।

पेशाब सम्बंधित समस्याएं या मूत्रकृच्छ में शरपुंखा के फायदे:

शरपुंखा के 20 पत्तों को पानी के साथ पीसकर, उनमें 3 नग काली मिर्च पीसकर डालकर थोड़ा थोड़ा करके पीने से मूत्रकृच्छ्र में बहुत लाभ होता है।

कुष्ठ रोग में लाभ –

शरपुंखा के पत्तों का रस 10 मि.ली. को दिन में तीन बार पीने से धीरे धीरे से कुष्ठ रोग में लाभ होता है। इसका फायदा महीनों बाद महसूस होता है।

बवासीर ठीक करने में शरपुंखा (sharphunkha cures piles)-

शरपुंखा के पत्ते और भांग के पत्तों को समान मात्रा में पीसकर, उनकी लुग्दी बनाकर, गुदा पर बांधने से खूनी बवासीर में फायदा पहुंचता है और जल्द ही यह रोग सही हो जाता है।

घाव को भरने में मदद करता है सरफोंका (Sharphunka cures wound):

सरफोंका में एंटी-बैक्‍टीरियल गुण होते हैं, इससे इंफेक्‍शन दूर होता है इसल‍िए इसे घाव पर लगा सकते हैं। घाव होने पर सरफोंका के फूल को पीसकर उसे शहद में म‍िलाकर चोट या घाव पर लेप को लगाएं तो घाव जल्‍द ही ठीक हो जाता है।

दस्त होने पर इस्‍तेमाल करें सरफोंका (Sharphunka cures diarrhea):

दस्‍त की समस्‍या होने पर सरफोंका का काढ़ा बनाकर पीने से दस्‍त की समस्‍या दूर होती है। इसके ल‍िए सरफोंका के फूल को पीस लें और उसमें लौंग म‍िलाकर म‍िश्रण तैयार करें अब इसे गुनगुने पानी में उबालकर इसका सेवन करें तो दस्‍त की समस्‍या दूर हो जाती है।

गुल्मरोग (Sarphonkha benefits in Gout disease):

इस रोग में गांठ के आकार में नस सूज जाती है। इसके समाधान के लिए शरपुंखा का मूल, हरड़ और सेंधानमक समान लेकर 2-3 छोटी चम्मच चूर्ण खाने से गुल्मरोग दूर होता है।

प्लीहा (तिल्ली का बढ़ जाना) में शरपुंखा के फायदे (Sarphonkha benefits in speen disease):

शरपुंखा की जड़ को मट्ठे के साथ पीसकर रोजाना सेवन करने से तिल्ली की समस्या ठीक हो जाती है।

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